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Friday, May 6, 2011

तमाशा

हाथ पकड़ कर लाये हो...
तो गले लगा लो
मेरी ओर ज़रा मुह मोड़ो,
सीली दियासलाई  छोड़ो...
मेरी सिग्रेट से,
अपनी सिग्रेट सुलगा लो

चिंगारी से ले चिंगारी...
हवन करो कड़वाहट सारी,
चलो..,
सिलवटें माथे की
कुछ सीधी कर लो
फूलों की बगिया में
थोड़ा और विचर लो

होठों से, धूएँ में सिमटा...
शब्द-शब्द,
छल्लों में लिपटा...
आस्मान पर छा'ता जाए
अच्छा हो, 'गर...
बारिश बन बरसे दोनों पर,
हृदय-पीर सहलाता जाए

दियासलाई  सीली-सीली,
रगड़-रगड़ कर तीली-तीली
यूं मत खेलो
छोड़ो..,  सुनो;
मेरी सिग्रेट से ही दम ले लो

पर जूते से मसल ना देना;
फिर से कोई...
नया 'तमाशा' मत कर देना


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